बड़ी कक्षाओं के बच्चों की शरारतें: एक आम समस्या | badi class ke bacchon ki shararate
बड़ी कक्षाओं के बच्चों की शरारतें: एक आम समस्या
बड़े बच्चों की चंचलता और अनुशासनहीनता क्यों बढ़ती है?
विद्यालय में पढ़ाते हुए मैंने यह अनुभव किया है कि जो बच्चे बड़ी क्लास के होते हैं वो बहुत चंचल और शैतान प्रवृत्ति के होते हैं, अक्सर आए दिन मार - पीट करना, छोटी क्लास के बच्चों को परेशान करना, आपस में ही हंगामा खड़ा कर देना जैसे उनकी दिनचर्या बन जाती है और पूरा विद्यालय इसका हल निकालने में अपनी पूरी ताक़त लगा देता है।गंदी गंदी गालियां देना मानों उन्हने ऐसा करने में आनंद आता हो! कई बार तो बात बहुत आगे तक बढ़ जाती है। समस्या यह भी है अब तो सरकार ने भी बच्चों की पिटाई पर प्रतिबंध लगा दिया है, आख़िर स्कूल करे तो करे क्या?
मैं बच्चों की बात नहीं कर रहा हूँ बस कुछ चुनिंदा ही बच्चे होते हैं लेकिन उनकी गिनती सीधे सादे बच्चों की तुलना में ज़्यादा होती है। उनमें अनुशासन पैदा करना और भी कठिन हो जाता है एक तो वो बड़े बच्चे होते हैं और उनका अध्यापक से डरना लगभग बंद सा हो जाता है। उनको यह पता होता है अमुक अध्यापक सिर्फ़ इतने हद तक ही हमें डरा सकता है। फिर इस समस्या का हल क्या है?
उनको मैदान में दौड़ाकर डंडे से बेहरहमी से मारा जाय। या फिर उन्हें बेहोश होने तक पीटा जाये। कई अध्यापक अपना आपा खो देते हैं और बच्चों को इतना मार देते हैं कि पूछो मत।क्या उनकी पिटाई करना इसका इलाज है?
नहीं!
बिल्कुल नहीं।
छोटी कक्षाओं के बच्चों को परेशान करने की आदत
फिर इसका इलाज़ क्या है?
उनको खूब खेल खिलाए जाये। ऐसे खेल जो उन्हें हाँफने पर मजबूर कर दे, पसीने से तर-बतर कर दे। सारी ऊर्जा जी निकल जाये शरीर की, फिर देखो कैसे शैतानी करते हैं। जब शरीर में शक्ति बचेगी तब करेंगे न शैतानी। हो गया इलाज़।
उनको कोई ज़िम्मेदारी वाला काम दे दो जैसे वो ध्यान दें कि सभी बच्चे लाइन में जा रहें हैं कि नहीं। उतरते हुए कोई बच्चा सीढ़ी से भाग तो नहीं रहा? फिर दखो कैसे शैतानी करते हैं?
जब व्यस्त रहेंगे! थके रहेंगे! तो शरारत कैसे करेंगे?
जो बच्चे पढ़ने में अच्छे नहीं होते वो अक्सर खेल में अच्छा प्रदर्शन करते हैं। इस बात को सभी विद्यालय को ध्यान में रखनी चाहिए।
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